जिस तरह एक प्रकार की तानाशाही दिखाते हुए जमी जमाई राम राज जैसी व्यवस्था को एक झटके में तहस नहस कर दी केंद्रीय नेतृत्व ने इससे कई सवाल खड़े हो रहे।अनुशासन और सुचिता का दम्भ भरने वाली पार्टी कुछ कच्चे कानों की होती जा रही जब विधानसभा चुनाव की व्यवस्था शानदार चल रही थी फिर सांसदों को उतारकर उन कर्मठ कार्यकर्तों के साथ धोखा किया जो वर्षो से पार्टी को खड़ा करने में लगे थे प्रदेश कार्यालय से एक अबाज में लाखों भोपाल पहुंच जाते थे बढ़िया सरकार चल रही थी जनहितकारी योजनाओं का लाभ जनता को मिल रहा था।पर सिर्फ एक व्यक्ति के कद से डरकर उसको गिराने के चक्कर मे पूरी व्यवस्था ही विगड़ गई।अरे केंद्रीय नेतृत्व को जनभवनाओ को ख्याल में रखना था जो अफसरशाही हावी हो रही थी उसको केंद्र से ही सुधार देते पर अपने ही पार्टी के नेताओं को हाशिये में रखने से क्या फायदा।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि मप्र में सिर्फ शिवराज की लाड़ली बहना योजना की लहर ने सरकार बनवा दी अब बनने के बाद कोई कुछ भी कहे जिनको मुख्यमंत्री बना दिया वह इस पद के लायक ही नहीं थे नैतिकता के आधार पर अब मंत्रिमंडल की बात आई तो ऐसे ऐसे मंत्री बना दिये जिनको न शासन का कोई अनुभव है न हो सकेगा जो अधिकारी कहेंगे वही करेंगे फिर विभाग बंटवारे में भी वही हुआ हाल ही में मंत्रियों के विभागों ने कोई छाप एशि नहीं छोड़ी जिसकी प्रशंसा की जा सके।वन विभाग के जो अधिकारी से मंत्री उनको न देकर अनाड़ी मंत्री को दे दिया नतीजा 20 साल में सबसे खराब वन मेला रहा वही जंगल की बेतहाशा कटाई हो रही।परिवहन में आर टी ओ लूट मचाकर रखें है ग्रह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री रखे है पर कोई नवाचार तो छोड़ो बनी बनाई व्यवस्था ही विगाड़ दी।
इसलिए यहाँ यह कहना लाजमी होगा आम जनता में एक अशांति है आक्रोश है उमंग तो उन्ही में दिख रही जो सत्ता के दलाल रहे।