'ये क्रिकेट नहीं, तमाशा है', हर्ष गोयनका ने खोली पोल; क्या खत्म हो रहा है सबसे अमीर लीग IPL का जलवा?

Updated on 09-05-2026
नई दिल्ली: आईपीएल के चमकते सितारों और चौके-छक्कों की गूंज के बीच क्या कोई ऐसा दीमक लगा है जो इस लीग की बुनियाद हिला रहा है? यह सवाल तब खड़ा हुआ जब आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा बम फोड़ा जिसने बीसीसीआई से लेकर फ्रेंचाइजी मालिकों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया। गोयनका ने एक बेहद गंभीर रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुलासा किया कि इस बार टीवी पर आईपीएल देखने वालों की संख्या में 26% की कमी आई है। सस्पेंस इस बात का है कि क्या करोड़ों की कमाई करने वाला यह टूर्नामेंट अब दर्शकों को बोर करने लगा है? गोयनका ने दो टूक शब्दों में कहा कि हर रात 225 बनाम 225 का स्कोर देखना अब क्रिकेट नहीं, बल्कि एक बोरियत भरी प्रदर्शनी बन चुका है।

सिर्फ रनों का अंबार नहीं, क्रिकेट चाहिए

हर्ष गोयनका का मानना है कि आईपीएल ने मनोरंजन के नाम पर खेल की अनिश्चितता को खत्म कर दिया है। उन्होंने बीसीसीआई को सुझाव दिया कि अगर इस गिरते ग्राफ को रोकना है, तो सबसे पहले इम्पैक्ट प्लेयर जैसे नियमों पर दोबारा विचार करना होगा। गोयनका ने कहा कि क्रिकेट तभी रोमांचक लगता है जब गेंद और बल्ले के बीच बराबरी की जंग हो। वर्तमान स्थिति में गेंदबाजों की भूमिका महज एक गेंद फेंकने वाली मशीन जैसी रह गई है, जिससे खेल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है।

स्टेडियम की बदहाली और फैंस का दर्द

गोयनका ने केवल टीवी व्यूअरशिप पर ही बात नहीं की, बल्कि उन फैंस का भी पक्ष रखा जो भारी भरकम टिकट खरीदकर स्टेडियम पहुंचते हैं। उन्होंने स्टेडियम के खराब अनुभव पर निशाना साधते हुए कहा कि खराब टॉयलेट्स, बैठने की असुविधा, खाने की किल्लत और प्रवेश-निकासी की मशक्कत दर्शकों को मैदान से दूर कर रही है। उनका सवाल सीधा है, जब दर्शक को बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो वह अपना समय और पैसा क्यों बर्बाद करेगा?

बीसीसीआई के लिए वेक-अप कॉल

संजीव गोयनका के भाई होने के नाते हर्ष गोयनका की इन बातों के गहरे मायने हैं। यह पहली बार है जब खेल के अंदरूनी हलकों से जुड़ा कोई व्यक्ति इतनी बेबाकी से आईपीएल की खामियों को उजागर कर रहा है। गोयनका ने स्पष्ट किया कि अगर समय रहते पिच की गुणवत्ता, नियमों में बदलाव और फैंस के सम्मान पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आईपीएल अपनी साख खो सकता है। अब देखना यह है कि क्या बीसीसीआई इस 26% की गिरावट को महज एक आंकड़ा मानता है या खेल के रोमांच को बचाने के लिए कड़े कदम उठाता है।

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