पारदर्शिता और कम लागत में बेहतरीन क्वालिटी देने के गोदरेज बंधु के विजन ने इस ब्रांड को अमर बना दिया। वैसे तो समय के साथ साबुन के निर्माण में तकनीकी सुधार हुए। साथ ही 1952 में इसी प्रक्रिया और शोध से 'सिंथॉल' जैसे आधुनिक और लोकप्रिय ब्रांड का जन्म हुआ। लेकिन, 'वतनी' और मधुबाला के विज्ञापनों से जुड़ी वे पुरानी यादें आज भी भारतीय विज्ञापन जगत और स्वतंत्रता काल के स्वर्णिम इतिहास का एक अहम हिस्सा हैं।