वैलिंग्टन: पृथ्वी की सतह और महासागरों के नीचे कई अद्भुत रहस्य छिपे हैं। ऐसे ही एक रहस्य का खुलासा 2017 में हुआ, जब वैज्ञानिकों ने दक्षिण प्रशांत महासागर के नीचे एक छिपे हुए महाद्वीप के होने की पुष्टि की। जीलैंडिया के नाम से जाना जाने वाला यह जमीन का टुकड़ा ज्यादातर पानी के नीचे डूबा हुआ है। यह सबके सामने ही सदियों से छिपा हुआ था और अब इसे आठवां महाद्वीप कहा जाता है। टेक्टोनिक्स में छपी एक स्टडी ने इसकी पहचान को पक्का किया और पृथ्वी की लगातार बदलती भौगोलिक संरचना के बारे में एक नया नजरिया दिया।वैज्ञानिकों ने इस नए महाद्वीप की खोज 2017 में की लेकिन इसकी तलाश 400 साल पहले शुरू हो गई थी। 1642 में ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम करने वाले डच कैप्टन एबेल तस्मान को एक दक्षिणी महाद्वीप की खोज करने का आदेश दिया गया था। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के अनुसार, 14 अगस्त 1642 को तस्मान दो जहाजों के साथ बटाविया से हिंद महासागर में मॉरिशस की ओर पश्चिम की तरफ रवाना होकर इस पर पहुंचे थे।जीलैंडिया का नामकरण
तस्मान की यात्रा के 375 साल बाद भूवैज्ञानिकों को इस मुख्य जमीन का पता चला। उन्होंने अमेरिकी भू-भौतिकीविद् ब्रूस लुयेंडिक के सुझाव पर इसका नाम जीलैंडिया रखा। न्यूजीलैंड की GNS साइंस के शोधकर्ताओं ने बताया कि जीलैंडिया की पानी के नीचे की संरचना को समझने और चट्टानों का भू-रासायनिक विश्लेषण करने के लिए उन्हें फेयरवे रिज से कोरल सागर तक चट्टानों के नमूने निकालने पड़े।
निक मोर्टिमर के नेतृत्व में उन्होंने पानी में डूबे हुए इलाके के उत्तरी दो-तिहाई हिस्से को स्कैन किया। वहां उन्हें अलग-अलग समय के कंकड़-पत्थर वाले बलुआ पत्थर, बारीक कणों वाले बलुआ पत्थर, मडस्टोन, बायोक्लास्टिक चूना पत्थर और बेसाल्टिक लावा मिले, जिसकी पुष्टि रेडियोकार्बन डेटिंग से हुई। इन पुरानी चट्टानों की अपनी एक कहानी है।ज्यादातर हिस्सा डूबा हुआ है
जीलैंडिया एक विशाल महाद्वीप है, जो 49 लाख (4.9 मिलियन) वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह जो मेडागास्कर से छह गुना बड़ा है लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा दक्षिण प्रशांत महासागर के नीचे डूबा हुआ है। केवल लॉर्ड होवे द्वीप पर 'बॉल्स पिरामिड' वाला इलाका ही पानी की सतह से ऊपर दिखता है। यह सभी ज्ञात महाद्वीपों में सबसे छोटा, सबसे पतला और सबसे नया है।आमतौर पर महाद्वीपीय क्रस्ट (सतह की परत) 40 किलोमीटर गहरी होती है, जो महासागरीय क्रस्ट (10 किलोमीटर) से अधिक मोटी होती है। जीलैंडिया के बहुत ज्यादा फैलाव के कारण इसकी क्रस्ट पतली (20 किलोमीटर) और आखिरकार समुद्र के नीचे गायब हो गई। 95 प्रतिशत जमीन के समुद्र में डूबे होने के बावजूद जीलैंडिया पृथ्वी पर एक ऐसी जगह के तौर पर है, जिसमें रहस्यमयी ऐतिहासिक तत्वों और पुरानी कहानियों का अनोखा आकर्षण है।जीलैंडिया की खास बातें
- जीलैंडिया आंशिक रूप से जलमग्न महाद्वीपीय खंडों का समूह है। इसमें 1.89 मिलियन वर्ग मील आकार का महाद्वीप शामिल है।
- करीब 375 वर्षों की अटकलों और खोज के बाद इसकी पुष्टि हुई है। माओरी भाषा में जीलैंडिया को रिउ-ए-माउई कहा जाता है।
- यह महाद्वीप 50 करोड़ वर्ष पूर्व गोंडवाना नामक महामहाद्वीप का हिस्सा था। गोंडवाना में ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका शामिल थे।
- लेट क्रेटेशियस काल में जीलैंडिया गोंडवाना से अलग होना शुरू हुआ और 4000 किमी लंबी पट्टीनुमा महाद्वीप के रूप में उभरा।
- यह धीरे-धीरे समुद्र के नीचे डूब गया। भूभाग का 94 फीसदी हिस्सा अभी भी पानी के नीचे 6,560 फीट की गहराई में डूबा है।