सिर्फ 13 साल की एथलीट ने गोल्ड मेडल जीत ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, दुनिया मुंह ताकती रह गई

Updated on 21-09-2026
आइची-नागोया: एशियन गेम्स 2026 के पहले ही दिन चीन की 13 साल की तैराक यू जिदी ने अपने शानदार प्रदर्शन से दुनिया को हैरान कर दिया। अगले महीने 14 साल की होने जा रही इस युवा खिलाड़ी ने महिलाओं की 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में 2 मिनट 05.08 सेकंड का समय निकालते हुए एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक से ठीक दो साल पहले यह उनके करियर का पहला बड़ा इंटरनेशनल खिताब है। मेडल जीतने के बाद मुस्कुराते हुए यू जिदी ने बेहद विनम्रता से कहा कि उनका यह प्रदर्शन 'सिर्फ ठीक-ठाक' था।


चीन का एकतरफा दबदबा

यू जिदी इससे पहले पिछले साल केवल 12 साल की उम्र में विश्व तैराकी चैंपियनशिप के इतिहास में पदक जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनी थीं, जब उन्होंने रिले स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। तैराकी में चीन के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतियोगिता के पहले ही दिन दांव पर लगे 7 स्वर्ण पदकों में से 6 पर चीनी तैराकों ने कब्जा जमाया।

कैसे जीता गोल्ड

यू जिदी ने अपनी हमवतन चांग मोहन को 3.36 सेकंड के बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया, जबकि चांग मोहन को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इस एशियन गेम्स में यू जिदी को तीन व्यक्तिगत स्पर्धाओं में हिस्सा लेना है, और उन्होंने अपनी पहली ही स्पर्धा में करियर का पहला बड़ा इंडिविजुअल गोल्ड हासिल कर लिया है।


वर्ल्ड चैंपियनशिप की सबसे युवा पदक विजेता और ओलंपिक की दावेदार

शॉर्ट पिक्सी हेयरकट के लिए पहचानी जाने वाली यू जिदी ने पिछले साल ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी। केवल 12 साल की उम्र में उन्होंने वर्ल्ड स्विमिंग चैंपियनशिप में चीन की 4x200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले टीम के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वे वर्ल्ड चैंपियनशिप इतिहास की सबसे युवा पदक विजेता बनी थीं। इसके अलावा वे तीन व्यक्तिगत स्पर्धाओं में चौथे स्थान पर रही थीं। इस साल मार्च में उन्होंने अमेरिका की ओलंपिक चैंपियन रीगन स्मिथ को हराकर दुनिया को चौंका दिया था। 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में उन्हें पदक की सबसे बड़ी दावेदारों में से एक माना जा रहा है।

कम उम्र में दबाव और नियम का सवाल

इतनी छोटी सी उम्र में वैश्विक मंच पर सफलता हासिल करना आसान नहीं रहा है। यू जिदी खुद कई बार इतने बड़े स्तर पर खेलने के मानसिक दबाव को लेकर बात कर चुकी हैं। पिछले साल चीन के नेशनल गेम्स से पहले 400 मीटर इंडिविजुअल मेडले का दबाव इतना बढ़ गया था कि वे सहम गई थीं, लेकिन उनके कोच ने उन्हें खुद पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया। नतीजा यह रहा कि उन्होंने नेशनल गेम्स में चार पदक अपने नाम किए।
उनकी इस तेजी से बढ़ती सफलता ने तैराकी जगत में कम उम्र के एथलीटों पर पड़ने वाले मानसिक और शारीरिक दबाव को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है। हालांकि वर्ल्ड एक्वेटिक्स के नियमों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए न्यूनतम उम्र 14 साल तय है, लेकिन क्वालिफाइंग स्टैंडर्ड पूरा करने वाले छोटे तैराकों के लिए इसमें छूट दी जाती है। इसी कारण यू जिदी ने एशियन गेम्स में हिस्सा लिया।

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