नई दिल्ली: टाटा ट्रस्ट्स का विवाद हाई कोर्ट पहुंच गया है। बंबई हाई कोर्ट में बुधवार को दायर एक याचिका में टाटा ट्रस्ट्स की शुक्रवार को होने वाली अहम बैठक को कैंसिल करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) ने महाराष्ट्र में ट्रस्टों से जुड़े नियमों में सितंबर 2025 में किए गए संशोधन का उल्लंघन किया है। इसलिए 1 सितंबर, 2025 के बाद लिए गए सभी फैसलों को अवैध करार दिया जाना चाहिए। टाटा ट्रस्ट्स का टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में मैज्योरिटी स्टेक है। इसमें एसआरटीटी का स्टेक 23.56% है।ईटी के मुताबिक यह याचिका सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े ने दायर की है। उनका तर्क है कि एसआरटीटी का मौजूदा बोर्ड महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट (संशोधन) एक्ट, 2025 के अनुरूप नहीं है। अगर कोर्ट इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करता है और याचिकाकर्ता को राहत देता है तो टाटा ट्रस्ट्स को अपनी मीटिंग रोकनी पड़ सकती है। इस मीटिंग को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें टाटा ट्रस्ट्स ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड में अपने रिप्रजेंटेशन की समीक्षा करने की तैयारी में है। अभी टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट के नॉमिनी हैं।कानून में संशोधन
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2025 में एक नई धारा जोड़ी गई थी। इसमे तहत स्थायी ट्रस्टियों की संख्या को ट्रस्ट की कुल क्षमता के एक-चौथाई तक सीमित कर दिया गया था। नया नियम पिछले साल 1 सितंबर से लागू हुआ था। याचिका के मुताबिक एसआरटीटी में भी छह ट्रस्टी हैं जिनमें से तीन जिम्मी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा स्थायी ट्रस्टी हैं। यह संख्या कुल स्ट्रेंथ का 50 फीसदी है जबकि कानून के मुताबिक 25 फीसदी होनी चाहिए।
ट्रस्टीज की संख्या
ट्रस्ट को तीन स्थायी सदस्य बनाए रखने के लिए ट्रस्टीज की संख्या बढ़ाकर 12 करनी होगी। मौजूदा स्ट्रक्चर में केवल एक ही व्यक्ति स्थायी ट्रस्टी हो सकता है। दिवंगत रतन टाटा के भाई जिम्मी टाटा इस ट्रस्ट में सबसे पुराने ट्रस्टी हैं। उन्हें 1989 में ट्रस्टी बनाया गया था। याचिका में महाराष्ट्र राज्य, चैरिटी कमिश्नर, एसआरटीटी के साथ-साथ नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह, जिम्मी एन टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा को प्रतिवादी बनाया गया है।