अब आसमान में छाए संकट के बादल, मंदी की तरफ बढ़ रहा भारत, शेयर बाजार के लिए खतरे की घंटी
Updated on
02-07-2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण समंदर में उठा कच्चे तेल का तूफान अब थमता दिखाई दे रहा है। लेकिन संकट के बादल छंटे नहीं है। भारतीय शेयर बाजार के लिए नया खतरा अब आसमान में मंडरा रहा है। जानकारों के मुताबिक कम बफर्स के साथ भारत मंदी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें अपने 2026 के उच्चतम स्तर यानी 120 डॉलर प्रति बैरल से 40% से अधिक टूट चुकी हैं। लेकिन, भारतीय शेयर बाजार के जो निवेशक कच्चे तेल में गिरावट के सहारे मार्केट में एक बड़े ब्रेकआउट यानी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं, वे शायद गलत इंडिकेटर देख रहे हैं। वैश्विक स्तर पर तेल के झटके का असर भले ही कम हो रहा हो, लेकिन आसमान में इससे भी कहीं गंभीर व्यापक आर्थिक खतरा मंडरा रहा है।क्या है यह बड़ा खतरा?
तेजी से विकसित हो रहे सुपर अल नीनो (Super El Nino) ने पिछले एक दशक में मानसून की सबसे खराब शुरुआत की है। इससे भारत की कुल जीडीपी का 56% हिस्सा, जो सीधे तौर पर घरेलू खपत से जुड़ा है, खतरे में पड़ गया है और शेयर बाजार एक सीमित दायरे में फंस गया है। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक पिछले दो वर्षों से निफ्टी का रिटर्न सपाट रहा है और अब भारतीय शेयरों के लिए जोखिम का केंद्र वैश्विक सप्लाई शॉक से बदलकर घरेलू मांग में गिरावट की ओर शिफ्ट हो गया है।
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