दिग्गज एक्टर और शो होस्ट शेखर सुमन ने अपने टॉक शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में मोदी सरका, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, Gen Z की भाषा और यहां तक कि छात्रों पर चली दिल्ली पुलिस की लाठियों पर जमकर ताना मारा है। अपने चिर-परिचति अंदाज में 63 साल के एक्टर ने व्यंग्य करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के रात 12 बजे वाले 'फ्रंट कैमरा वीडियो' पर भी तंज कसा। बात निकली तो कहा कि सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि उन्हें Gen Z की भाषा सीखने की जरूरत है। जबकि ये सरकार तो पहले से ही Gen Z की भाषा में माहिर है। शेखर ने छात्रों पर एक्सपायर्ड आंसू गैस के गोले दागने को लेकर भी कटाक्ष करते हुए दिल्ली पुलिस को कोसा, वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बीजेपी नेताओ की वाहवाही पर भी खूब चुटकी ली।'शेखर टुनाइट' के 12वें एपिसोड में शेखर सुमन के मेहमान 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' फेम म्यूजिक कम्पोजर शाश्वत सचदेव थे। लेकिन उनके शो में आने से पहले शेखर की पॉलिटिकल कमेंट्री देश के मौजूदा हालात और शिक्षा व्यवस्था पर काफी कुछ कह गई।'PM ने फ्रंट कैमरे पर 'फ्रेंड्स' कहा, Gen Z बोला- फ्रेंड रिक्वेस्ट डिनाइड'
शेखर सुमन ने कहा, 'पीएम ने पहली बार फ्रंट कैमरा में, जेन-ज़ी स्टाइल एक वीडियो रिकॉर्ड किया। अब वो 'मित्रों' की जगह 'फ्रेंड्स' बोले। रात को 8 बजे की जगह 12 बजे आए और मन की बात की जगह इंस्टा पर Gen Z की बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जब 'फ्रेंड्स' बोला, तो सामने से आवाज आई- फ्रेंड रिक्वेस्ट डिनाइड।'
प्रधानमंत्री के रील पर 300 मिलियन व्यूज पर भी कटाक्ष
एक्टर ने आगे कहा, 'देखा जाए तो मोदी जी जो भी काम करते हैं, उसमें रिकॉर्ड बना ही लेते हैं। जैसे हाल ही में उन्होंने एक रील पोस्ट की जिसने 24 घंटे में 300 मिलियन व्यूज क्रॉस किए हैं। तालियां हमारे प्रधानमंत्री जी के लिए 300 मिलियन व्यूज। वाओ वाओ। इससे एक बात तो साफ हो गई। रील वायरल करने के लिए एल्गोरिथम सही हो या ना हो सिस्टम गलत होना चाहिए।शेखर सुमन बोले- PM को कितनी पीड़ा हुई होगी, पेपर लीक को 'घोर पाप' कहा
प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए शेखर सुमन ने आगे कहा, 'प्रोटेस्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पेपर लीक को 'घोर पाप' कहा और फिर भी विपक्ष कहता है कि उन्हें बच्चों की चिंता नहीं है। अरे वो चाहते तो इसे सिर्फ एक अपराध कह के आगे बढ़ सकते थे, लेकिन नहीं उन्होंने घोर पाप कहा। सोचिए कितनी पीड़ा, कितनी वेदना हुई होगी उनके हृदय में इस घटना से। तभी तो इस पीड़ा को बयां करने में उन्हें पूरे 3 महीने लग गए।' शेखर समुन आगे कहते हैं, 'अब कहने को आप यह भी कहेंगे कि बयान देने से क्या होता है? भाई बहुत कुछ होता है। हमें पता चलता है कि अगली बार पेपर लीक पर विशेषण कौन सा इस्तेमाल करना है। और बयान इसलिए भी दिए जाते हैं ताकि जनता को पता चल जाए कि सरकार को अब पता चल गया है। फिर पता चलता है कि जनता तो इसी इंतजार में थी कि देखते हैं सरकार को कब पता चलता है। पर उम्मीद है यह पाप पाप ही रहे। वरना अगर त्यौहार बन गया तो पता चला हर साल जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक जी को 25 दिन अनशन पे बैठना पड़ रहा है।''सरकार Gen Z की भाषा में पहले से ही माहिर'
मोदी सरकार की ओर से मंत्रियों और नेताओं को Gen Z से जुड़ने की सलाह दी गई है। इस पर शेखर कहते हैं, 'हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कैबिनेट बैठक में सभी मंत्रियों को Instagram पर सक्रिय रहने और रील्स बनाने की सलाह दी। चलिए अब सरकार की तरफ से अच्छे दिन आए ना आए, अच्छी रील्स तो आएंगी। निर्मला सीतारमण जी ने कहा है कि सरकार को Gen Z की भाषा में बात करनी चाहिए। मुझे लगता है कि सरकार को जेन-ज़ी की भाषा सीखने की कोई जरूरत नहीं है, वो इसमें पहले से ही माहिर हैं।'Gen Z ट्रेंड्स में समझाया जनता और सरकार का रिश्ता
सरकार और जनता के रिश्ते को Gen Z के ट्रेंड्स के हिसाब से समझाते हुए शेखर सुमन आगे कहते हैं, 'सरकार और जनता का रिश्ता सालों से पहले ही सिचुएशनशिप में फंसा हुआ है। कब तक रहेगा, किसी को नहीं पता। इलेक्शन से पहले लव बॉम्बिंग होती है, हर तरफ प्यार ही प्यार... नई नई घोषणाएं, नए नए वादे, फिर इलेक्शन खत्म होते ही सीधा घोस्टिंग। जनता मैसेज पे मैसेज करती रहती है, बेरोजगारी... महंगाई... तानाशाही। उधर से आश्वासन के साथ-साथ 'लास्ट सीन' भी ऑफ हो जाता है। कुछ मुद्दों पर सरकार ऑर्बिटिंग भी करती है। मतलब दूर से नजर बनाए रखती है, जहां ट्वीट में 'हमें खेद है' के सिवा कुछ नहीं मिलता। बीच-बीच में 'ब्रेडक्रंबिग' भी चलती रहती है या 'बेंचिंग' भी चलता रहता है। कभी कमिटी, कभी इंक्वायरी, ताकि जनता रिश्ता भी न तोड़े और उम्मीद भी न छोड़े... और पांच साल बाद वही लव बॉम्बिंग, फर्क सिर्फ इतना है कि रिलेशनशिप में लोग 'रेड फ्लैग' नहीं पहचान पाते और इलेक्शन में रेड फ्लैग जानने के बाद भी लोग यही टॉक्सिसिटी चुनते हैं। जेन-ज़ी के रिश्ते टूटने पर दो लोग Suffer (झेलना) करते हैं, लेकिन जनता और सरकार के बीच रिश्ता बिगड़ा तो पूरे देश को 'सफर' करना पड़ता है।आंसू गैस के एक्सपायर्ड गोलों पर तंज
शेखर सुमन ने आगे व्यंग्य का सहारा लेते हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और इस दौरान पुलिस की बर्बरता की भी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एक्सपायर हो चुके आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करने के लिए भी पुलिस को आड़े हाथों लिया है। दिग्गज एक्टर ने कहा, 'कहते हैं हर चीज के एक्सपायरी डेट होती है और उस एक्सपायरी डेट के बाद भी अगर वो चीज इस्तमाल की जाए तो वो नुकसान देह हो सकती है! 20 जुलाई को छात्रों के आंदोलन को खदेड़ने के लिए दिली पुलिस ने लाठियों के साथ साथ टियर गैस के गोले भी दागे। हैरानी की बात ये नहीं है कि उन्होंने छात्रों के साथ ऐसा किया, बल्कि हैरानी के बाद ये है कि उन टियर गैस के गोलों की एक्सपायरी डेट गुजर चुकी थी। क्या विडंबना है, देखिए ये सरकार, ये प्रशासन... ये काम भी ठीक से नहीं कर सकी। शायद उन सरकारी बाबूओं के चश्मों के नंबर या फिर उनके कॉम्पिटिंसी की एक्सपायरी डेट भी गुजर गई। पता नहीं है ये सरकार उन आंखों को क्यों रूलाना चाहती थी, जो पहले से ही लीक पेपर्स और खोखली शिक्षा व्यवस्था को लेकर खून के आंसू रो रही थी। शायद इस देश के शिक्षा व्यवस्था की खत्म हो चुकी एक्सपायरी डेट नजर ना आए, इसलिए ये आंसू गैस के गोले फेंके जा रहे थे।'शेखर सुमन ने दिल्ली पुलिस को घेरा, कहा- ये सरकार नहीं, पीसी सरकार भी है
शेखर सुमन ने आगे कहा, 'दिल्ली पुलिस की लाठियां तब तक चलती रहीं, जब तक कई मासूम छात्र घायल नहीं हो गए। दिल्ली पुलिस का मोटो यानी ध्येय वाक्य है- शांति, सेवा और न्याय। उस दिन छात्रों का शांति से चल रहा आंदोलन, पुलिस की सेवा, और सरकार का न्याय, तीनों की एक्सपायरी डेट मानों गुजर गई। उस दिन पता चला सरकार सिर्फ सरकार नहीं, पीसी सरकार भी है, जब 20 दिन लगातार अनशन पर बैठे एक बंदे को सफेद चादर के पीछे से चादू से गायब कर दिया। संभालिए हुजूर संभालिए... कहीं ऐसा न हों कि इस देश का लोकतंत्र खतरे में आ जाए और उसकी एक्सपायरी डेट खत्म हो जाए। और आप तो जानते हैं कि एक्सपायरी डेट खत्म होने के बाद भी अगर किसी चीज का इस्तमाल किया जाए तो वो नुकसान देह हो सकता है।'