अमेरिका ने मौका देखकर पकड़ की मजबूत, LNG एक्‍सपोर्ट में बढ़ाई धाक, भारत के लिए मतलब

Updated on 19-06-2026
नई दिल्ली: नेचुरल गैस (एलएनजी) एक्‍सपोर्ट में अमेरिका ने अपनी पकड़ मजबूत की है। पश्चिम एशिया के बीच संकट के दौर में उसे ऐसा करने का मौका मिला। ग्‍लोबल मार्केट की स्थितियां अमेरिका के लिए अनुकूल बन गई हैं। इसकी वजह यूरोप और एशिया में गैस की ऊंची कीमतें हैं जो अमेरिकी एक्सपोर्ट को बढ़ावा दे रही हैं। भारत पर भी इसका असर पड़ना तय है।

भारत के लिए मतलब

  • भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए अब और अधिक सतर्क रहना होगा।
  • यूरोप और एशिया में गैस की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिकी निर्यात वहां डाइवर्ट हो रहा है।
  • चूंकि भारत अपनी कुल जरूरत की लगभग आधी नेचुरल गैस विदेश से खरीदता है।
  • इसलिए वैश्विक बाजार में मची इस होड़ से भारत को महंगे दामों पर 'स्पॉट एलएनजी' खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
  • इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे बिजली उत्पादन, यूरिया (फर्टिलाइजर) और घरेलू सीएनजी-पीएनजी की लागत बढ़ने से आम जनता पर महंगाई का बोझ आ सकता है।
  • राहत की बात यह है कि भारत के जो पहले से तय 'लॉन्ग-टर्म' एलएनजी सौदे हैं, वे इस वैश्विक उतार-चढ़ाव के सीधे झटके को काफी हद तक रोक कर रखेंगे।

मजबूत हुई हैं कीमतें

इस साल की शुरुआत में कीमतों में भारी गिरावट के बाद नेचुरल गैस की कीमतों में काफी मजबूती आई है। इसके पीछे इन्वेंट्री में कमी, LNG एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और मौसम के हिसाब से बिजली की बढ़ती मांग जैसे कारण हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) की तिमाही रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हेनरी हब नेचुरल गैस की कीमतें अब वापस 3 डॉलर प्रति MMBtu के स्तर से ऊपर चली गई हैं। जनवरी में ये 7.72 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) के सबसे ऊंचे स्तर से गिरकर अप्रैल में 2.77 डॉलर प्रति MMBtu हो गई थीं।

MOFSL की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, यह सुधार उम्मीद से कम स्टोरेज इंजेक्शन, बिजली सेक्टर से अधिक खपत और अमेरिकी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इंफ्रास्ट्रक्चर के लगातार विस्तार के कारण हुआ है।

क्या है संकेत?

रिपोर्ट में बताया गया है कि हालिया इन्वेंट्री डेटा बाजार में धीरे-धीरे संतुलन बनने का संकेत देता है। हाल के महीनों में सप्लाई की अधिकता (सप्लाई ओवरहैंग) की चिंताएं कम हुई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, 'स्टोरेज में बढ़ोतरी लगातार तीन हफ्तों तक उम्मीद से कम रही है, जबकि साल-दर-साल सरप्लस अप्रैल के स्तर से काफी कम हो गया है। इससे पता चलता है कि हाल के महीनों में सप्लाई की अधिकता की चिंताएं काफी कम हुई हैं।'

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोप में स्टोरेज के ट्रेंड भी गैस बाजार में संतुलन के कड़े होने का संकेत देते हैं। इससे कीमतों के लिए बेहतर नजरिया बनता है।

मौसम के हिसाब से मांग ने भी सुधार में योगदान दिया है। गर्म मौसम के कारण बिजली की खपत बढ़ी है। बिजली उत्पादकों की ओर से गैस का इस्तेमाल भी बढ़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया, 'जैसे-जैसे गर्मियों के महीनों में ठंडक की जरूरत बढ़ती है, यूटिलिटीज बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक ईंधन का इस्तेमाल कर रही हैं।'

अमेरिका के लिए अनुकूल हैं स्थितियां

रिपोर्ट में बाजार की स्थितियों को तय करने में LNG एक्सपोर्ट की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया गया। इसमें कहा गया है कि 2026 तक एक्सपोर्ट की मात्रा बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि नई LNG सुविधाएं अपना कामकाज बढ़ा रही हैं। अतिरिक्त लिक्विफिकेशन ट्रेनें चालू हो रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, '2026 के दौरान एक्सपोर्ट की मात्रा बढ़ने का अनुमान है क्योंकि नई सुविधाएं अपना कामकाज बढ़ा रही हैं और अतिरिक्त लिक्विफिकेशन ट्रेनें चालू हो रही हैं। घरेलू उत्पादन और विदेशी बाजारों के बीच बढ़ता जुड़ाव सप्लाई को संतुलित करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।'
रिपोर्ट के अनुसार, ग्‍लोबल मार्केट की स्थितियां अमेरिकी LNG शिपमेंट के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। कारण है कि यूरोप और एशिया में गैस की ऊंची कीमतें एक्सपोर्ट को बढ़ावा दे रही हैं।

इसमें कहा गया, 'हेनरी हब की तुलना में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की ऊंची कीमतें अमेरिकी LNG एक्सपोर्ट के अर्थशास्त्र को समर्थन दे रही हैं।'

दिख रहा है यह बदलाव

रिपोर्ट में AI-केंद्रित डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार को भी नेचुरल गैस की मांग के एक नए और लंबे समय तक चलने वाले स्रोत के तौर पर बताया गया है। साथ ही, भरोसेमंद बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए गैस से चलने वाले बिजली उत्पादन में निवेश भी बढ़ रहा है।
इन नतीजों पर टिप्पणी करते हुए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में कमोडिटीज रिसर्च के प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, 'इस साल की शुरुआत में आई भारी गिरावट के बाद नेचुरल गैस बाजार में एक अहम बदलाव दिख रहा है। इन्वेंट्री का स्तर कम हो रहा है। एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जारी है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही बिजली सेक्टर में खपत भी तेज़ी पकड़ रही है।'

उन्होंने आगे कहा कि डेटा सेंटरों से पैदा हो रही नई जरूरतें खपत का एक अतिरिक्त स्रोत बना रही हैं।

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