संजीव गोयनका को तमिलनाडु के दिग्गज स्पिनर का ऑफर, LSG का स्पिन बॉलिंग कोच बनने की इच्छा जताई, लिखा- रिजल्ट दूंगा

Updated on 18-10-2026
नई दिल्ली: आईपीएल 2027 के लिए खिलाड़ियों को रीटेन और रिलीज करने की विंडो 15 नवंबर तक खुली है। हालांकि, सभी टीमें खिलाड़ियों से पहले अपना कोचिंग स्टाफ ठीक करने में लगी हुई हैं। मुंबई और चेन्नई ने अपने कोचिंग स्टाफ में बदलाव किया है। दिल्ली के कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव हुआ है। इस बीच तमिलनाडु के पूर्व स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने लखनऊ सुपर जाएंट्स का स्पिन बॉलिंग कोच बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने एक्स पर संजीव गोयनका को टैग करते हुए लिखा है कि वह रिजल्ट देंगे।

अपने ही एक्स पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए उन्होंने आगे लिखा कि वह दिखाना चाहते हैं कि स्पिनर टी20 में मैच विनर हो सकते हैं। उन्होंने तीसरे पोस्ट में लिखा, 'जैसा कि महान शेन वॉर्न कहते थे कि जब तक आप मांगते नहीं, आपको मिलता नहीं है। जब उन्होंने बहुत अपील करने के बारे में पूछा गया था। यह खास तौर पर एलएसजी के लिए नहीं है। यह किसी भी फ्रेंचाइजी, किसी भी स्पिनर के लिए है।'

कार्ल क्रो हैं लखनऊ के स्पिन बॉलिंग कोच

इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर कार्ल क्रो लखनऊ के मौजूदा स्पिन बॉलिंग कोच हैं। लखनऊ ने अब तक उन्हें इस पद से हटाने को लेकर कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन शिवरामकृष्णन ने इस पद पर काम करने की इच्छा जाहिर की है। शिवरामकृष्णन की इस पोस्ट ने आईपीएल 2027 से पहले लखनऊ की कोचिंग व्यवस्था और स्पिन गेंदबाजी विभाग को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, उनकी पोस्ट में कार्ल क्रो का नाम लेकर उन्हें हटाने की मांग नहीं की गई है।

लगातार बदल रहा है LSG का कोचिंग स्टाफ

लखनऊ सुपर जायंट्स के कोचिंग स्टाफ में पिछले कुछ सीजन में कई बदलाव हुए हैं। टीम के शुरुआती सीजन में एंडी बिचेल बॉलिंग कोच थे, जबकि 2023 में मोर्ने मोर्कल तेज गेंदबाजी कोच की भूमिका में आए। बाद के सीजनों में भी टीम के सहयोगी स्टाफ में बदलाव हुए। आईपीएल 2026 से पहले लखनऊ ने भरत अरुण को बॉलिंग कोच और कार्ल क्रो को स्पिन बॉलिंग कोच की जिम्मेदारी सौंपी। क्रो इससे पहले कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ काम कर चुके हैं और वरुण चक्रवर्ती तथा सुनील नरेन जैसे स्पिनरों के साथ उनके काम की चर्चा हुई है।

आईपीएल 2026 में LSG के स्पिनर्स का प्रदर्शन

लखनऊ के स्पिनरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदर्शन में निरंतरता की कमी दिखाई देती है। मनीमारन सिद्धार्थ ने चार मैचों में छह विकेट लिए, जबकि दिग्वेश राठी ने 10 मैचों में पांच विकेट हासिल किए। शाहबाज अहमद के नाम पांच मैचों में पांच विकेट रहे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्पिन विभाग में विकेट लेने की क्षमता मौजूद थी, लेकिन सभी गेंदबाज एक समान प्रभाव नहीं छोड़ सके। खासकर राठी और शाहबाज की इकॉनमी अपेक्षाकृत महंगी रही। ऐसे में मध्य ओवरों में रन रोकने और नियमित अंतराल पर विकेट निकालने की चुनौती टीम के लिए अहम रही।

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