सलमान खान की फिल्म 'लकी' की हीरोइन स्नेहा उल्लाल पहुंचीं बिहार, गांव की महिलाओं के ही रंग में रंगी दिखीं

Updated on 01-10-2026
कभी ऐश्वर्या राय की हमशक्ल होने को लेकर सुर्खियां बटोरने वालीं सलमान खान की एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल बिहार पहुंची हैं। बता दें कि बिहार इन दिनों जमुई वाले कांड को लेकर चर्चा में है। अब हाल ही में सलमान खान के साथ फिल्म 'लकी: नो टाइम फॉर लव' में नजर आनेवालीं स्नेहा उल्ला बिहार पहुंची और वहां के लोगों की तारीफ भी की है।

बता दें कि स्नेहा गया में अपनी फिल्म अर्धनायक की शूटिंग कर रही हैं। इस दौरान गांव की महिलाओं के साथ उनका काफी अपनापन दिखा और उनके साथ उनके ही रंग में ढली दिखीं एक्ट्रेस।

'बहुत प्यारे लोग हैं यहां पर, बहुत अच्छा लग रहा है'

स्नेहा उल्लाल बिहार के लोकल लोगों की तारीफ करते हुए ईटीवी को दिए बयान में कहा, 'बहुत प्यारे लोग हैं यहां पर, बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत ही सॉफ्ट है नेचर। मैं ये सब नहीं जानती थी पहले पर अभी इनके साथ मिलना-जुलना हो गया और पता चला कि कितने प्यारे लोग हैं।'

गया आना पहली बार हुआ

स्नेहा ने इस बातचीत में बताया कि वह इससे पहले पटना आ चुकी हैं लेकिन गया आना पहली बार हुआ और यहां फिल्म की शूटिंग का यह उनका पहला अनुभव है।

'जब मेरी पहली फिल्म थी तो तब मैं काफी छोटी थी'

उन्होंने इस बारे में खुलकर बातचीत करते हुए कहा, 'मैं पहले भी पटना आ चुकी हैं लेकिन गया में फिल्म की शूटिंग का यह पहला अनुभव है। यहां के लोगों के व्यवहार और अपनापन अच्छा लगा, जब मेरी पहली फिल्म थी तो तब मैं काफी छोटी थी और एक्टिंग की दुनिया में नई थी। उस दौर में निर्देशक और कलाकार जैसा बताते थे, उसी तरह करने की कोशिश करती थी।'

डुंगेश्वरी पहाड़ी से कुछ दूर स्थित एक महादलित टोले में शूटिंग कर रही हैं

स्नेहा उल्लाल इन दिनों बोधगया की डुंगेश्वरी पहाड़ी से कुछ दूर स्थित एक महादलित टोले में शूटिंग कर रही हैं। इस फिल्म की शूटिंग के बीच वह गांव की महिलाओं के साथ वक्त बिताती हैं और उनके रहन-सहन, परंपराओं और जिंदगी को समझने की कोशिश करती हैं।

'अर्धनायक' में लालमुनिया देवी नाम की महिला का किरदार

बताया जा रहा है कि स्नेहा फिल्म 'अर्धनायक' में लालमुनिया देवी नाम की गांव की महिला का किरदार निभा रही है। फिल्म की कहानी 1950 के दशक के ग्रामीण समाज की है। स्नेहा के लिए गांव की महिलाओं से मिलना और उनके जीवन को करीब से समझना इस किरदार के लिए बेहद जरूरी भी था।

ग्रामीण जीवन, लोक कलाओं के धीरे-धीरे खत्म होने की कहानी

इस फिल्म की कहानी साहित्यकार शैवाल ने लिखी है और इसका निर्देशन अंजनी कुमार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म की कहानी ग्रामीण जीवन, लोक कलाओं के धीरे-धीरे खत्म होने और गांवों की चुनौतियों पर बेस्ड है।

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