'हर पानी की बोतल Bisleri नहीं होती', भारत में लोग जब पीते थे नल का पानी, एंट्री मार जरूरत बन गई

Updated on 20-09-2026
नई दिल्‍ली: भारत में जब कोई यात्रा के दौरान या बाहर पीने के पानी की बोतल मांगता है तो अक्‍सर मुंह से 'बिसलेरी' निकलता है। कभी सिर्फ अमीर विदेशी पर्यटकों और एलीट क्‍लास तक ही बोतलबंद पानी का ट्रेंड था। लेकिन, आज बिसलेरी हर आम-ओ-खास की जरूरत बन चुकी है। साल 1965 में शुरू हुए इस इटैलियन ब्रांड की यात्रा को 1969 में पारले (रमेश चौहान) ने नया भारतीय मोड़ दिया। इसे साधारण पानी से देश के सबसे भरोसेमंद पैकेज्ड वॉटर ब्रांड में बदल दिया। लगभग 2,000-2,500 करोड़ रुपये के सालाना रेवेन्‍यू और 35% मार्केट शेयर के साथ बिसलेरी आज मिसाल है। यह उदाहरण है कि सही डिस्ट्रीब्यूशन, इनोवेशन और मार्केटिंग से एक कमोडिटी को भी देश का बड़ा ब्रांड बनाया जा सकता है।

1960 के दशक में भारत में बोतल बंद पानी का कोई बाजार ही नहीं था। लोग नल या उबले हुए पानी पर भरोसा करते थे। बिसलेरी की शुरुआत एक इटैलियन डॉक्टर-बिजनेसमैन ने की थी। इसका मकसद सिर्फ अपर क्‍लास के लोगों को मिनरल वॉटर मुहैया कराना था। 1969 में रमेश चौहान (पारले) ने इसका अधिग्रहण किया। फिर इसका भारतीयकरण शुरू हुआ। उन्होंने एहसास किया कि भारत में शुद्ध और सुरक्षित पानी की बड़ी जरूरत है। इसी को ध्यान में रखकर 10-चरणों के प्‍यूरिफिकेशन प्रोसेस को ब्रांड का मुख्य स्तंभ बनाया। इसे 250 ml कप से लेकर 500 ml, 1 लीटर, 2 लीटर की PET बोतलों और 20 लीटर के बड़े कैन में किफायती दामों (10-20 रुपये) पर उपलब्ध कराया गया।

बिसलेरी की सफलता में उसकी प्रभावी विज्ञापन रणनीतियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। 2000 के दशक में 'Play It Safe' कैंपेन से लोगों में अनजान स्रोतों से पानी पीने के बजाय सुरक्षित पैकेज्ड पानी चुनने का मैसेज दिया गया। इसके बाद 2018 में 'हर पानी की बोतल बिसलेरी नहीं होती' कैंपेन आया। इसमें ऊंट के किरदारों का इस्तेमाल कर मजेदार अंदाज में नकली बोतलों से सावधान रहने की हिदायत दी गई। हाल ही में 2022 में 'समझदार जानते हैं, बिसलेरी ही पीते हैं' कैंपेन के जरिए शहरी युवाओं को स्वच्छता, स्मार्ट पसंद और ब्रांड की प्रामाणिकता से जोड़ा गया।

बिसलेरी की असली ताकत उसका बेजोड़ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन नेटवर्क है। कंपनी 120 से ज्‍यादा बॉटलिंग प्लांट के साथ हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करती है। इससे हर क्षेत्र में फटाफट और ताजा पानी की सप्‍लाई सुनिश्चित होती है। रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, रेस्तरां, ढाबों से लेकर अस्पतालों और स्कूलों तक, बिसलेरी की पहुंच 12 लाख से ज्‍यादा आउटलेट्स तक है। इसके अलावा समय के साथ तालमेल बैठाते हुए कंपनी ने 'Bisleri@Doorstep' सेवा शुरू की। इसके जरिए अब बड़े शहरों में सीधे घरों और दफ्तरों तक पानी के केन डिलीवर किए जाते हैं।

बिसलेरी की सबसे बड़ी चुनौती उसका जेनेरिक नाम बनना और इसके मिलते-जुलते नाम वाली नकली या लोकल बोतलों का बाजार में आना रहा है। इसके जवाब में बिसलेरी ने न सिर्फ कानूनी कदम उठाए, बल्कि उपभोक्ता जागरूकता कैंपेन भी चलाए। पेप्सीको (एक्‍वाफिना), कोका-कोला (किनले) और टाटा (हिमालयन) जैसी दिग्गज कंपनियों के तगड़े मुकाबले के बावजूद बिसलेरी ने अपने पहले-आने के फायदे यानी फर्स्‍ट-मूवर एडवांटेज को बनाए रखा। मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन के दम पर बाजार में अपनी नंबर-1 स्थिति बरकरार रखी। वर्तमान में 25 से ज्‍यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी बिसलेरी प्रीमियम हिमालयन मिनरल वॉटर 'वेदिका', कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन के विस्तार के साथ लगातार आगे बढ़ रही है।


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