दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलज' का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। करीब चार साल ये यह फिल्म सेंसर बोर्ड के पास अटकी थी। मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जब वहां से भी बात नहीं बनी तो मेकर्स ने इस फिल्म को बिना सेंसरशिप से OTT पर रिलीज कर दिया। लेकिन 03 जुलाई को Zee5 पर रिलीज के 48 घंटे के भीतर ही फिल्म वहां से भी हटा दी गई। अब इस फिल्म को लेकर राजनीतिक बहसबाजी, आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दूसरी ओर, पंजाब के अलग-अलग इलाकों में पब्लिक स्क्रीनिंग की जा रही है। इन तमाम घटनाओं के बीच पहली बार फिल्म के डायरेक्टर हनी त्रेहान ने चुप्पी तोड़ी है। वह दो टूक शब्दों में बताते हैं कि मोदी सरकार के मंत्रालय से फिल्म को रोकने के लिए चिट्ठी भेजी गई थी।'रात अकेली है' और 'शर्माजी नमकीन' जैसी फिल्में बना चुके हनी त्रेहान 'इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में कहते हैं, 'फिल्म को OTT पर रिलीज करने का फैसला प्रोड्यूसर्स और प्लेटफॉर्म ने लिया था। सरकार की तरफ से दबाव डाला गया और हमें रिलीज टालनी पड़ी। इसलिए यह पूरी तरह से उनका फैसला था। मुझे इसबारे में कुछ दिन पहले ही पता चला। प्रोड्यूसर्स ने फोन पर बताया कि Zee5 'पंजाब '95' को किसी दूसरे टाइटल के साथ रिलीज करना चाहता है।'हनी त्रेहान बोले- 'पंजाब '95' और 'सतलज' नाम CBFC से मंजूर हैं
यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बन रही थी। लेकिन सेंसर बोर्ड ने कथित तौर पर फिल्म में 120 से ज्यादा कट्स बताए थे। इस कारण करीब 4 साल से विवाद चल रहा था। फिल्म का टाइटल बदलने को लेकर हनी त्रेहान कहते हैं, 'जब CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) ने मुझसे ओरिजिनल टाइटल 'घल्लूघारा' (जिसका मतलब नरसंहार है) बदलने के लिए कहा था, तो मैंने उन्हें 2-3 नाम दिए थे, इनमें 'पंजाब '95' और 'सतलज' शामिल थे। तो यह CBFC से मंजूर किया गया टाइटल था, न कि कोई नया नाम।'Zee5 को फिल्म रोकने के लिए मंत्रालय से चिट्ठी मिली
हनी त्रेहान आगे कहते हैं कि उनकी जानकारी में सरकार को यह नहीं पता था कि मेकर्स 'सतलज' को ओटीटी पर रिलीज कर रहे हैं। जहां तक सरकार की प्रतिक्रिया की बात है, तो वह साफ जाहिर है और दुनिया देख सकती है। वह बोले, 'मुझे कोई फोन नहीं आया। न तो मेरे प्रोड्यूसर्स को किसी ने कॉल किया। हां, Zee5 को फिल्म रोकने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से एक पत्र जरूर मिला। जब 48 घंटों में फिल्म OTT से हटा दिया गया तो मेरा दिल टूट गया... बैन आपको एक मुश्किल स्थिति में डाल देता है और आप खुद से यह पूछने पर मजबूर हो जाते हैं... क्या हम सच में किसी लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं?''जसवंत सिंह खालड़ा का फिर से अपहरण किया जा रहा'
'सतलज' पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित है। डायरेक्टर कहते हैं, '31 साल पहले पंजाब पुलिस ने जसवंत सिंह खालड़ा का अपहरण करके उनकी हत्या कर दी थी। उस समय उन्हें न्याय दिलाने में केंद्र सरकार ने अहम भूमिका निभाई थी। मैं यही कहना चाहूंगा कि आज 31 साल बाद खालड़ा का फिर से अपहरण किया जा रहा है... मैं केंद्र सरकार से बस यही गुजारिश करता हूं कि वे बड़ा दिल दिखाएं, हमारे प्रति दयालु बनें और हमें उनकी कहानी दुनिया को बताने दें। खालड़ा का दोबारा अपहरण न करें।''पंजाब में सब साथ मिलकर फिल्म देख रहे, फिर बंटवारा कैसे?'
फिल्म को लेकर सरकारी तंत्र का कहना है कि इसका इस्तेमाल 'दुश्मन' ताकतों, पाकिस्तान या अलगाववादी गुटों द्वारा गलत तरीके से किया जा सकता है। इस पर हनी त्रेहान कहते हें, 'इस बात का कोई आधार है क्या? उनका कहना है कि मेरी फिल्म पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ सकती है। इसके उलट फिल्म ने असल में पंजाब को एकजुट किया है। आप पंजाब जाकर देखिए, हिंदू और सिख लोग साथ मिलकर फिल्म देख रहे हैं। वे कहते हैं कि मेरी फिल्म समाज में बंटवारा कर रही है। फिल्म लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम करती है। लेकिन सरकार ने फिल्म पर बैन लगा दिया और अब यह एक आंदोलन बन गया है। 10 दिन हो गए हैं। हर कोई शांति और भाईचारे के साथ फिल्म देख रहा है और उन्हें 'लंगर' भी परोसा जा रहा है।'
'प्रोपेगैंडा फिल्मों को सरकार का समर्थन मिलता है'
हनी त्रेहान ने आगे दो टूक शब्दों में कहा, 'इस देश की कानून-व्यवस्था के लिए ज्यादा नुकसानदेह क्या है? मेरी फिल्म जिसने लोगों को जोड़ा है या नेताओं के नफरत भरे भाषण, जिनका मकसद हमें बांटना है? प्रोपेगैंडा फिल्मों को सरकार का समर्थन मिलता है। अगर आप कहते भी हैं कि मेरी मूवी भी प्रोपेगैंडा है, तो इसे भी वैसे ही रिलीज होने दीजिए जैसे आपने दूसरी प्रोपेगैंडा फिल्में रिलीज की थीं। फर्क क्यों?'IDC ने ओटीटी से कहा- फिल्म पर बैन लगाओ
जब डायरेक्टर से पूछा गया कि क्या उन्होंने किसी सरकारी पैनल से मुलाकात की? उन्होंने जवाब दिया, 'मैं इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (IDC) के साथ हुई एक चर्चा में शामिल था। मैंने उन्हें बस इतना बताया कि यह फिल्म मेरे लिए क्यों जरूरी थी। लेकिन दो दिन बाद Zee5 ने मुझे बताया कि IDC ने कहा है, 'फिल्म पर बैन लगाओ।' जब मैंने सुना तो मैंने सोचा, 'ठीक है, अब क्या किया जाए?' इस देश की राजनीति को, हर चीज को इतना पोलाराइज्ड (ध्रुवीकृत) करने की जरूरत क्यों है? मुझे समझ नहीं आता।''मेरी फिल्म 'सतलज' एकतरफा नहीं है'
हनी त्रेहान डंके की चोट पर कहते हैं कि उनकी फिल्म एकतरफा नहीं है। वह तर्क देते हैं, 'मैं गर्व से कहता हूं कि अगर आप मेरी कला की बुराई करना चाहते हैं, तो पहले इसे पूरा देखें। आपको सुग्गा (सुविंदर विक्की) और CBI कॉप, जिसका रोल अर्जुन रामपाल ने किया है, के बीच की बातचीत सुनाई देगी, जहां सुग्गा उससे कहता है 'हमारी एक एक गोली यहां हजारों गोलियों के बदले चलती है।' या चीफ मिनिस्टर और DGP बिट्टा के किरदारों के बीच की बातचीत, जहां बिट्टा उससे कहता है कि उसके बिना, पंजाब में मिलिटेंसी खत्म नहीं होती। मैं एक फिल्ममेकर हूं और अपने किरदारों से खुद बोलने को कहता हूं। मैंने फिल्म में यह भी बताया है कि प्रॉक्सी वॉर में हजारों पुलिस वाले मारे गए। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।'
'हमने खालड़ा के 25000 एनकाउंटर के दावों को अनुमानित बताया'
'सतलज' में पंजाब में 25,000 एनकाउंटर में हुई मौतें को बढ़ा-चढ़ाकर बताने के भी आरोप लग रहे हैं। इस पर डायरेक्टर ने कहा, 'यह खालड़ा पर बेस्ड है। वह हमेशा 25,000 एनकाउंटर की बात करते थे। उसके भाषण ऑनलाइन अवेलेबल हैं। इसलिए मुझे उसकी सच्चाई दिखानी है। लेकिन क्लैरिटी के लिए और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैंने फिल्म में फिर भी बताया है कि यह एक अनुमानित आंकड़ा है। दिलजीत जहां भी इसका जिक्र करते हैं, वह कहते हैं 'अनुमानित 25,000 एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग।''CBFC ने दबाव डाला, इसलिए हमने केस वापस ले लिया'
आम फिल्मों की तरह 'सतलज' को सेंसर सर्टिफिकेट मिलने का इंतजार क्यों नहीं किया गया? जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा था, तो केस वापस क्यों लिया गया? बातचीत के आखिर में हनी त्रेहान इस पर कहते हैं, 'शुरू में CBFC ने हमें 21 कट का सुझाव दिया। हम उस पर सहमत नहीं थे। हमने कहा कि यह सही नहीं हैं। फिर, हम बॉम्बे हाई कोर्ट गए। जुलाई 2023 तक हम लगभग जीत की स्थिति में थे। बस एक सुनवाई बाकी थी। लेकिन, सेंसर बोर्ड ने दबाव डाला और हमसे कोर्ट के बाहर समझौता करने के लिए कहा गया। लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने 21 के बजाय 127 कट्स लगाने को कहा। इसके बाद हमने इंटरनेशनल रिलीज का फ़ैसला किया। हमने हाई कोर्ट से केस वापस ले लिया, ताकि CBFC यह तर्क न दे सके कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है।'