संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की मिसाल है बीजापुर की मनीषा नायक

Updated on 25-05-2026

 रायपुर। यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है। बेरोजगारी और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों के आगे घुटने टेकने के बजाय, उन्होंने नवाचार का रास्ता चुनकर अपनक भ्सवष्य को संवार सकते हैं। आज छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की रहने वाली 22 वर्षीय मनीषा नायक ने यह साबित कर दिया है। वे एक सफल राइस मिल संचालक के रूप में न केवल आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुकी हैं।

संघर्ष और दुविधा का वो शुरुआती दौर’

मनीषा नायक का जीवन सफर शुरुआत में काफी संघर्षमय रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अदद स्थायी रोजगार के लिए उन्होंने लंबे समय तक प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग रही थी। समय बीतने के साथ भविष्य की चिंता और मानसिक तनाव गहराता गया। एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने के कारण उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवार का संबल बनने की थी। ऐसे नाजुक मोड़ पर मनीषा ने हताश होने के बजाय स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने का साहसिक निर्णय लिया।

’उम्मीद की एक नई किरण’

इसी बीच एक परिचित के माध्यम से मनीषा को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर के बारे में पता चला। वहाँ पहुँचने पर विभागीय अधिकारियों ने उन्हें अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से केंद्र सरकार की पीएमएफएमई (PMFME) योजना की बारीकियों से अवगत कराया।

’पीएमएफएमई योजना- आत्मनिर्भरता का नया आधार’

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना विशेष रूप से उन महत्वाकांक्षी युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। विभाग से मिले मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने मनीषा के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया। उन्हें यह विश्वास हो गया कि वे भी अपने दम पर एक सफल उद्यमी बन सकती हैं।

’बैंक ऋण से शुरू हुआ उद्यम का सफर’

जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र के सहयोग से मनीषा ने भारतीय स्टेट बैंक की भैरमगढ़ शाखा में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत ऋण के लिए आवेदन किया। विभागीय समन्वय और सभी आवश्यक कागजी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद, उन्हें 2 लाख 70 हजार रुपये का बिजनेस लोन स्वीकृत हुआ। यह आर्थिक सहायता उनके सपनों की उड़ान के लिए पहली मजबूत सीढ़ी साबित हुई।

’राइस मिल की स्थापना- खुद की तरक्की के साथ ग्रामीणों को भी बड़ी राहत’

 ऋण राशि मिलते ही मनीषा ने बिना समय गंवाए अपने ग्रामीण क्षेत्र में एक अत्याधुनिक राइस मिल की स्थापना की। मनीषा की यह पहल केवल उनके स्वयं के रोजगार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरे गांव की एक बड़ी समस्या का समाधान कर दिया।

’समय और पैसे की बचत’

इससे पहले ग्रामीणों को अपने धान से चावल निकलवाने के लिए 5 से 8 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, जिससे उनका समय, पैसा और श्रम तीनों व्यर्थ होते थे। अब स्थानीय स्तर पर ही यह सुविधा मिल जाने से ग्रामीणों में भारी खुशी है।

’आय के बहुआयामी स्रोत’

मनीषा अब न केवल धान से चावल निकालकर ग्राहकों को दे रही हैं, बल्कि सह-उत्पाद के रूप में निकलने वाली धान की भूसी और ब्रान (चोकर) को भी बाजार में बेच रही हैं, जिससे उनकी व्यावसायिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

चुनौतियों से मुकाबला और महिलाओं के लिए प्रेरणा

व्यवसाय की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी। एक महिला के लिए मशीनरी के संचालन को समझना, बाजार में पैठ बनाना और ग्राहकों से बेहतर तालमेल बिठाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन मनीषा ने धैर्य, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास से हर बाधा को पार कर लिया। मनीषा नायक की यह सफलता छत्तीसगढ़ की नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है। उनकी यह कहानी संदेश देती है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सही अवसर और शासकीय योजनाओं का संबल मिले, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा भी बदल सकती हैं।

विभाग का आभार और भविष्य के संकल्प

अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए मनीषा नायक ने जिला उद्योग केंद्र, बीजापुर के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है, जिसके सहयोग से उनका यह सपना साकार हो सका। भविष्य की योजनाओं को लेकर मनीषा काफी उत्साहित हैं। वे आने वाले समय में अपने इस राइस मिल व्यवसाय का और अधिक विस्तार करना चाहती हैं, ताकि वे अपने क्षेत्र की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भरता की मुख्यधारा से जोड़ सकें।



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