तुर्की संग मिलकर सैन्य ताकत बढ़ाने की हड़बड़ी में बांग्लादेशी आर्मी चीफ, ड्रोन फैक्ट्रियों की छानी खाक, भारत अलर्ट
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27-07-2026
ढाका: बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां ने बीते हफ्ते पांच दिन का तुर्की का दौरा किया है। वह दौरा खत्म कर शनिवार, 25 जुलाई को ढाका लौटे हैं। जनरल वकार के तुर्की दौरे की जो जानकारी सामने आई है, उससे पता चलता है कि उनका पूरा फोकस बांग्लादेश के लिए हथियार खरीद पर था। उन्होंने पांच दिन में तुर्की की आठ डिफेंस इंडस्ट्रीज का दौरा किया। इनमें तुर्की की सबसे आधुनिक रक्षा निर्माण सुविधाएं भी हैं। यह बांग्लादेश के तुर्की से रक्षा सहयोग, सैन्य आधुनिकीकरण और तकनीक हासिल करने पर बढ़ते जोर को दिखाता है।नॉर्थ ईस्ट न्यूज के मुताबिक, जनरल वकार उज जमां ने तुर्की में जिन प्रमुख रक्षा उद्योगों और सैन्य प्रौद्योगिकी संगठनों का दौरा किया। उनमें- एसिसगार्ड, टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (TUSAS), माकिने और किम्या एंडुस्ट्रिसि ए.एस (एमकेई), सारसिलमाज, एसटीएम, रॉकेस्टन, एसेल्सन और बायकर शामिल हैं। ये इंडस्ट्री ड्रोन, मिसाइल और दूसरे आधुनिक हथियार बनाती हैं।रक्षा सहयोग पर चर्चा
रिपोर्ट में बताया गया है कि जनरल वकार ने इस दौरों पर बांग्लादेश और तुर्की के रक्षा उद्योगों के बीच संभावित सहयोग पर लंबी चर्चा की है। दोनों देशों में आने वाले समय में यह सहयोग सैन्य हार्डवेयर और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर एयरोस्पेस, मानवरहित प्रणालियों और स्वदेशी क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों में हो सकता है।वकार ने राजनीतिक लोगों से ज्यादा तुर्की के सैन्य अफसरों से मुलाकात की है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री यासर गुलर, तुर्की जनरल स्टाफ के प्रमुख सेल्चुक बायराक्तारोग्लू, तुर्की थल सेना कमांडर जनरल मेटिन टोकेल और इस्तांबुल नौसेना शिपयार्ड के निदेशक रेसेप एर्दिनक येतकिन से मुलाकात की। वह प्रेसीडेंसी ऑफ डिफेंस इंडस्ट्रीज (SSB) के प्रतिनिधियों से भी मिले, जो तुर्की की रक्षा खरीद संस्था है।तुर्की का रक्षा उद्योग
तुर्की ने हालिया वर्षों में तेजी से अपने रक्षा निर्यात को बढ़ाया है। तुर्की कई तरह के सैन्य उपकरण बनाता है। इनमें खासतौर से ड्रोन, बख्तरबंद वाहन, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, संचार प्रणाली और रडार शामिल हैं। तुर्की अपने हथियार उद्योग का इस्तेमाल दूसरे देशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए भी कर रहा है। इसमें भारत के दो पड़ोसी- पाकिस्तान और बांग्लादेश भी हैं।बीते दो हफ्ते में पाकिस्तान और बांग्लादेश और पाकिस्तान, दोनों के आर्मी चीफ तुर्का का दौरा कर चुके हैं। यह तुर्की प्रेसीडेंट रेसेप एर्दोगन की क्षेत्र में मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश को दिखाता है। पाकिस्तान में तुर्की पहले ही पैर जमाए हुए। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद से तुर्की ने बांग्लादेश के साथ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी तेजी से बढ़ाई है।भारत की क्यों लगी नजर
तुर्की के बांग्लादेश को मिलिट्री हार्डवेयर सप्लाई करने और ढाका में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिशों पर भारत की नजर लगी हुई है। दरअसल भारत की अपने पूर्वी बॉर्डर को लेकर सुरक्षा चिंताएं हैं। तुर्की और पाकिस्तान का अपने खिलाफ गठजोड़ ऑपरेशन सिंदूर के समय साफतौर पर भारत देख चुका है।
तुर्की और पाकिस्तान को अगर बांग्लादेश में पैर जमाने का मौका मिलता है तो भारत के बॉर्डर क्षेत्रों में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान की बांग्लादेश बॉर्डर से भारत के लिए परेशानी पैदा करने का मंसूबा किसी से छुपा नहीं है। तुर्की का साथ इसे भारत के लिए खतरनाक बना सकता है।
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