'ईमानदार अफसर ने पूरे महाराष्ट्र को हिला दिया', IAS तुकाराम मुंढे की मुरीद हुईं देवोलीना, कहा- इनके कई तबादले हुए

Updated on 14-08-2026
आमतौर पर किसी अफसर की पहचान उसके पद से बनती है। लेकिन तुकाराम मुंढे के मामले में, उनकी पहचान इस बात से बनी है कि पद संभालने के बाद वे क्या काम करते हैं। 25 मई को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर का पद संभालने के बाद से, मुंढे ने पूरे राज्य में थोक विक्रेताओं, निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं और रेस्तरां पर छापेमारी का अभियान चलाया है। जहां भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं, उनपर कार्रवाई की गई, लाइसेंस सस्पेंड करना, सैंपल जब्त करना और कानूनी कार्रवाई शुरू करना, सबकुछ हुआ। जहां मुंढे के कई सारे लोग फैन बने हुए हैं, वहीं एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी भी उनकी दीवानी हो गई हैं और उन्होंने मुंढे की खुलकर तारीफ भी की है।

'साथ निभाना साथिया' टीवी शो से फेमस हुईं एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो हर मुद्दे पर अपनी राय रखती हैं और बिना डरे खुलकर बोलती हैं। चाहे बात बुराई पर बोलने की हो, या अच्छे काम की तारीफ करने की, देवोलीना भट्टाचार्जी हमेशा ही आगे रहती हैं। इस बार उन्होंने महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंढे की तारीफ की है।

देवोलीना भट्टाचार्जी ने की तुकाराम मुंढे की तारीफ

देवोलीना ने X पर ट्वीट किया, 'सोचिए... एक ईमानदार अफसर ने पूरे महाराष्ट्र को हिलाकर रख दिया है और लोग उनके काम की तारीफ कर रहे हैं। अगर हर विभाग में उनके जैसे अफसर हों, तो अपराधी कानून तोड़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। अफसोस की बात है कि न्यायपालिका के अनुसार, खाने में तीन कॉकरोच मिलने पर भी लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। और हम सब जानते हैं कि मुंढे सर का कितनी बार एक जगह से दूसरी जगह तबादला किया गया है।'

21 साल में 25 बार हुए तबादले

अगर हम बात करें ऑफिसर मुंढे की, तो जो बात उन्हें सबसे अलग बनाती है, वह सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि उनका करियर ग्राफ है। 'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 साल की सर्विस के दौरान उनका 25 बार तबादला हुआ है। यह संख्या उनकी पहचान का उतना ही अहम हिस्सा बन गई है, जितना कि उनका काम।

तुकाराम मुंढे कौन हैं ?

मुंढे की शुरुआती जिंदगी उन सरकारी दफ्तरों और गलियारों से बहुत अलग थी जहां वे आज काम करते हैं। 3 जून 1975 को बीड जिले के ताडसोना गांव में जन्मे मुंढे एक किसान परिवार में पले-बढ़े। वे अपना समय जिला परिषद के स्कूल और परिवार के खेत में काम करने के बीच बांटते थे। यह भारत के कई ग्रामीण बच्चों की आम दिनचर्या है, जहां पढ़ाई और मेहनत-मजदूरी शायद ही कभी अलग-अलग होती हैं।

तुकाराम मुंढे का करियर कैसे आगे बढ़ा?

बहुत से लोगों का मानना ​​है कि इसी अनुभव ने उन्हें रोजमर्रा की प्रशासनिक चुनौतियों को समझने में मदद की, और यह समझ उन्हें उन चुनौतियों को हल करने की जिम्मेदारी मिलने से बहुत पहले ही हो गई थी। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद, मुंढे ने 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की। ​​इसके बाद वे 2005 बैच में IAS में शामिल हुए। यह एक गांव के क्लासरूम से देश की सबसे प्रभावशाली सेवाओं में से एक में शामिल होने तक का एक बड़ा सफर था।

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