'इनकी लड़ाई के आगे महाभारत भी फीका', SC की करिश्‍मा के पूर्व पति Sunjay Kapur सम्पत्ति विवाद पर दो टूक

Updated on 13-05-2026
करिश्मा कपूर के दिवंगत एक्स हसबैंड संजय कपूर की 30 हजार करोड़ रुपये की विरासत को लेकर मां रानी कपूर और विधवा प्रिया के बीच चल रही लड़ाई बढ़ती ही जा रही है। बता दें कि सास और बहू के बीच संपत्ति को लेकर लड़ाई संजय कपूर की मौत के बाद शुरू हुआ था। उनकी मौत पिछले साल जून में इंग्लैंड में पोलो खेलते समय हो गई थी। इस घटना के बाद से ही पारिवारिक कलह सुर्खियों में है जहां संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर रघुवंशी इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (RIPL) के 18 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग को रोकने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस केस को लेकर कहा कि ये हाई-स्टेक पारिवारिक गाथा महाभारत को भी छोटा बना देगी।

कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 14 मई को करेगा। न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला ने रानी कपूर की नई याचिका पर विचार करने के लिए सहमति जताई और कॉमेंट करते हुए कहा, 'हम एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। महाभारत बहुत छोटा लगेगा।'

रानी कपूर की ओर से पेश वकील ने दलील दी

बताया जा रहा है कि रानी कपूर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के 7 मई के आदेश को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें विवाद के पक्षों को सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए मीडिएटर का सहारा लेने को कहा गया था। इस पर जस्टिस ने कहा, 'हम इस मामले की जांच करेंगे।'

18 मई को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक को बुलाने का नोटिस

जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। मंगलवार को रानी कपूर के वकील ने जस्टिस उज्ज्वल भुयान की अध्यक्षता वाली पीठ को ये जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक दिन बाद, 8 मई को, रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (आरआईपीएल), जिसके पास विवादित संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा है, ने 18 मई को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक बुलाने का नोटिस जारी किया।

18 मई की बैठक के एजेंडे में ये बातें शामिल

रिपोर्ट्स के मुताबिक वकील ने तर्क दिया कि 18 मई की बैठक के एजेंडे में दो नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति और ऑथराइज़् बैंक हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव शामिल हैं, और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थता के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने के प्रयास की भावना के विरुद्ध है।

नॉन बैंकिंग फाइनैंशिल कंपनियों के लिए आरबीआई के गाइडलाइन के अनुरूप

आरआईपीएल के वकील ने कहा कि यह नॉन बैंकिंग फाइनैंशिल कंपनियों के लिए आरबीआई के गाइडलाइन के अनुरूप ही है। बताया जा रहा है कि रानी कपूर के वकील ने इसे नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और आरआईपीएल के बैंक खातों के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की नियुक्ति के माध्यम से कंपनी के निवेश के फैसलों को नियंत्रित करने की कोशिश कही है।

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