मालदीव ने जैसे ही चुकाई भारत से लिए कर्ज की आखिरी किस्त, फ‍िर फंसा मुइज्‍जू का देश, टेंशन

Updated on 18-09-2026
माले: मालदीव ने गुरुवार को भारत को 150 मिलियन डॉलर का बकाया चुका दिया है। यह रकम 2019 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सुविधा के जरिए ली गई थी। 17 सितंबर को 50 मिलियन डॉलर की तीसरी और आखिरी किस्त चुका दी गई। इसके साथ ही पिछले दो सालों से भारत द्वारा लोन को बार-बार आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) का सिलसिला खत्म हो गया। हालांकि इससे मालदीव का मुद्रा भंडार काफी कम हो गया है, जो उसके लिए मुश्किल का सबब हो सकता है।

एसबीआई ट्रेजरी बिल (T-Bill) की मियाद इसी हफ्ते खत्म होने वाली थी। इससे पहले भारत ने भुगतान की समय-सीमा को आगे बढ़ाया था, जिससे माले को T-Bill चुकाने के लिए और समय मिल गया। यह लोन मूल रूप से 2019 में इब्राहिम सोलिह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार को दिया गया था। यह लोन मालदीव के बजट में मदद के लिए एक आपातकालीन उपाय के तौर पर दिया गया था। इसकी मूल राशि 200 मिलियन डॉलर थी। मुइज्जू प्रशासन ने 2023 के अंत में सत्ता संभालने के बाद जनवरी 2024 में पहली किस्त चुकाई थी।
हमने 2019 में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से लिए गए 150 मिलियन डॉलर के लोन का भुगतान पूरा कर लिया है और आखिरी 50 मिलियन डॉलर की किस्त चुका दी है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व में हमारी सरकार पहले से योजना बनाकर और सॉवरेन डेवलपमेंट फंड में नियमित योगदान देकर जिम्मेदारी से कर्ज प्रबंधन कर रही है।
मालदीव के वित्त मंत्री हसन ज़रीर ने

भारत ने 50 मिलियन डॉलर किए थे 'माफ'

भारत ने घोषणा की थी कि कुल राशि में से 50 मिलियन डॉलर ग्रांट (अनुदान) के तौर पर दिए गए थे और उन्हें वापस करने की जरूरत नहीं है। इस तरह 100 मिलियन डॉलर का भुगतान बाकी रह गया था। इसे लेकर मुइज्जू प्रशासन को पिछले कुछ सालों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। भारत ने मई 2024 में 50 मिलियन डॉलर के T-Bill को पहली बार आगे बढ़ाया था, जबकि दूसरे बिल की समय-सीमा भी सितंबर 2024 में बढ़ाई गई थी।
यही प्रक्रिया 2025 में भी जारी रही। इस साल की शुरुआत में 11 मई को, मालदीव सरकार ने T-Bill की मियाद खत्म होने से पहले ही 50 मिलियन डॉलर चुका दिए थे, जिससे भारत का बकाया घटकर 50 मिलियन डॉलर रह गया था। आखिरकार ये भुगतान गुरुवार को पूरा कर लिया गया। इस साल की दूसरी तिमाही तक मालदीव का गारंटीकृत विदेशी कर्ज घटकर 3.59 अरब डॉलर हो गया है, जबकि 2025 के फाइनेंशियल ईयर के आखिर में यह 4.05 अरब डॉलर था। यह विदेशी कर्ज चुकाने की माले की कोशिशों को दिखाता है।
हमने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड में नियमित रूप से पैसे जमा करना, कर्ज चुकाने की समय-सीमा से काफी पहले वित्तीय इंतजाम करना, और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों व विकास सहयोगियों के साथ बातचीत बनाए रखना जैसे कदम उठाए हैं। यह देश के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को मजबूत करने और कर्ज चुकाने जैसी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं।
मालदीव वित्त मंत्रालय

मालदीव का मुद्रा भंडार

इस ताजा भुगतान से इस महीने मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार 600 मिलियन डॉलर से कम हो जाएगा, जिससे उसके पास डेढ़ महीने से कुछ अधिक समय का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। मालदीवियन मॉनेटरी अथॉरिटी (MMA) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के आखिर में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 643.8 मिलियन डॉलर था।
MMA के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 के लिए उसका कुल आयात बिल 339.26 मिलियन डॉलर था। हाल के वर्षों में देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दबाव में रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को चालू रखने के लिए देश काफी हद तक आयात पर निर्भर है। अप्रैल के बाद से इसके आयात बिल में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है।

MMA के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में देश ने 36.7 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जिससे बड़े व्यापार घाटे का पता चलता है। इसका असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। मार्च 2026 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था लेकिन अगस्त में यह गिरकर 643.8 मिलियन डॉलर के मौजूदा स्तर पर आ गया।

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