TATA में घमासान के बीच बैंकों ने मांगा Air India से हिसाब, 10000 करोड़ रुपये का कर्ज देने से पहले पूछे ये सवाल

Updated on 30-09-2026
नई दिल्ली: एयर इंडिया करीब 10,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाने की तैयारी कर रही है। इस रकम का इस्तेमाल विमान बेड़े के विस्तार, मौजूदा विमानों के रिफर्बिशमेंट और रोजमर्रा के ऑपरेशनल खर्चों के लिए किया जाना है। हालांकि, घाटे में चल रही एयरलाइन के कैशफ्लो को लेकर कुछ बैंकों ने नया कर्ज देने से पहले अतिरिक्त जानकारी मांगी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कर्जदाता एयर इंडिया के बोर्ड और टाटा संस के नेतृत्व को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं। एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन होने के साथ एयर इंडिया के बोर्ड के भी चेयरमैन हैं।

कैशफ्लो को लेकर मांगी जानकारी

इकोनॉमिक टाइम्स मुताबिक, कुछ निजी क्षेत्र के बैंक एयर इंडिया की कैशफ्लो स्थिति और टर्नअराउंड प्लान को लेकर ज्यादा स्पष्टता चाहते हैं। वहीं, सरकारी बैंक मौजूदा क्रेडिट लाइन को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इसके पीछे टाटा ग्रुप के साथ उनका संबंध और एयर इंडिया की मजबूत क्रेडिट रेटिंग को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

AAA क्रेडिट रेटिंग के बावजूद सवाल

एयर इंडिया को AAA क्रेडिट रेटिंग हासिल है, जिसे सबसे कम जोखिम वाली रेटिंग माना जाता है। इसके बावजूद कुछ बैंक एयर इंडिया एयरलाइन के लगातार घाटे और कैशफ्लो को लेकर सतर्क हैं।
टाटा ग्रुप ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया। ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एविएशन जैसे नए कारोबार को मुनाफे में आने में समय लगता है और एयरलाइन की स्थिति असामान्य नहीं है। उनके मुताबिक, लोन की ब्याज दरों को लेकर बातचीत चल रही है और एयर इंडिया को एक प्रमुख बैंक से पहले ही पर्याप्त कर्ज मिल चुका है।

एक साल में दोगुने से ज्यादा घाटा

  • एयर इंडिया का कंसोलिडेटेड घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में यह घाटा 10,858 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में घाटा दोगुने से भी ज्यादा हो गया।
  • घाटे में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा से जुड़ा नुकसान भी रहा।
  • FY26 में एयरलाइन का फॉरेन एक्सचेंज लॉस बढ़कर 7,388 करोड़ रुपये हो गया, जबकि FY25 में यह 1,545 करोड़ रुपये था।

टाटा ग्रुप करेगा लगातार निवेश

एयर इंडिया के कर्जदाताओं के लिए एक राहत यह है कि टाटा संस एयरलाइन में अपनी कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दे चुका है। हालांकि, कुछ कर्जदाताओं को चिंता है कि भविष्य में कर्ज की अदायगी के लिए एयरलाइन को प्रमोटर की ओर से लगातार इक्विटी सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। वर्तमान में टाटा संस के पास एयर इंडिया की 74.9% हिस्सेदारी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास बाकी 25.1% हिस्सेदारी है।
जून में टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई पूंजी डालने को मंजूरी दी थी। यह 2021 में एयरलाइन के अधिग्रहण के लिए 18,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के बाद टाटा ग्रुप का एयर इंडिया में सबसे बड़ा निवेश है।

40000 करोड़ का कर्ज बकाया

एयर इंडिया पर मौजूदा कर्ज सुविधाएं करीब 40,000 करोड़ रुपये की हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मई के अंत के खुलासे के मुताबिक, एयर इंडिया का सबसे बड़ा कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) है। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक का स्थान है।

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