'मरीजों को मौत के कुएं में धकेल रहा प्रशासन...' इमरजेंसी वार्ड को रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में शिफ्ट करने पर भड़के भोपाल के गैस पीड़ित

Updated on 24-07-2026
भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का गुस्सा गुरुवार को कमला नेहरू अस्पताल परिसर में फूट पड़ा। चार प्रमुख पीड़ित संगठनों के बैनर तले एकजुट हुए सैकड़ों पीड़ितों ने वहा धरना-प्रदर्शन किया

उनका कहना था कि गैस पीड़ितों के लिए आरक्षित इमरजेंसी वार्ड और इलाज की सुविधाओं से छेड़छाड़ की गई, तो उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

रेडिएशन का खतरा

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इमरजेंसी वार्ड को हमीदिया अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में शिफ्ट करना गैस पीड़ितों को सीधे खतरे में डालने जैसा है। वहां हर वक्त खतरनाक विकिरण (रेडिएशन) का खतरा बना रहता है। दावा किया गया कि परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (एईआरबी) की मंजूरी में साफ लिखा है कि संबंधित क्षेत्र को मरीजों का वेटिंग एरिया नहीं बनाया जा सकता।
इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन और पीईटी-सीटी का ठेका लेने वाली कंपनी पीड़ितों को असुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बदलाव से पहले न तो कोई सुरक्षा जांच हुई और न ही एईआरबी से मंजूरी ली गई है।

एसीएस काे पत्र से दी जानकारी

भोपाल ग्रुप फार इंफार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर मुख्य सचिव (एसीएस) गैस राहत को पत्र लिखा है। समिति ने इस प्रस्ताव को अनुचित बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी का कहना था कि अस्पताल प्रशासन और ठेकेदार मरीजों को जबरदस्ती मौत के कुएं में धकेल रहे हैं।

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