ITR में गलती से दिखाए EPF के 9.60 लाख रुपये, इनकम टैक्स ने भेज दिया नोटिस, ITAT ने सुनाया बड़ा फैसला

Updated on 20-09-2026
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय हुई एक गलती मुंबई के एक टैक्सपेयर को भारी पड़ गई। रिटर्न में गलती से 9.60 लाख रुपये की रकम EPF से मिली आय के तौर पर दिखा दी गई। इसके आधार पर इनकम टैक्स विभाग ने इस रकम को उसकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ दिया। हालांकि, मुंबई ITAT ने अब टैक्सपेयर को बड़ी राहत देते हुए 9.60 लाख रुपये की पूरी टैक्स एडिशन हटाने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मुंबई के इस टैक्सपेयर ने 25 जुलाई 2022 को अपना आईटीआर दाखिल किया था। इसमें उसने कुल 28.25 लाख रुपये की सैलरी इनकम घोषित की थी। आईटीआर तैयार करते समय डेटा एंट्री की गलती के कारण 9.60 लाख रुपये को धारा 10(11) के तहत टैक्स फ्री इनकम (Exempt Income) के तौर पर दिखा दिया गया।
टैक्सपेयर गुजरात की एक प्राइवेट कंपनी में प्लांट मैनेजर के पद पर काम करता था और EPFO के दायरे में आता था। उसका कहना था कि उसने संबंधित वित्त वर्ष में न तो EPF से कोई पैसा निकाला था और न ही ईपीएफओ से 9.60 लाख रुपये का कोई ब्याज या अन्य रकम प्राप्त की थी।

टैक्स विभाग ने क्यों जोड़ी रकम?

इनकम टैक्स विभाग ने टैक्सपेयर से 9.60 लाख रुपये की छूट के संबंध में दस्तावेज और सबूत मांगे। इनकम टैक्स अधिकारी (AO) इन दस्तावेजों से संतुष्ट नहीं हुआ। एओ का कहना था कि जब टैक्सपेयर ने आईटीआर में पीएफ की रकम को घोषित किया है और उसकी टैक्स छूट साबित नहीं कर पाया, तो इस रकम को टैक्सेबल इनकम में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके बाद 11 मार्च 2024 को धारा 143(3) और 144B के तहत असेसमेंट पूरा करते हुए एओ ने 9.60 लाख रुपये को टैक्सेबल इनकम में जोड़ दिया। CIT(A) ने भी इस एडिशन को बरकरार रखा। इसके बाद टैक्सपेयर ने मुंबई ITAT का रुख किया।

ITAT में कैसे मिली राहत?

19 जून 2026 को ITAT मुंबई ने टैक्सपेयर के पक्ष में फैसला दिया। ट्रिब्यूनल ने पाया कि इनकम टैक्स विभाग के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था, जिससे यह साबित हो कि टैक्सपेयर ने वास्तव में 9.60 लाख रुपये प्राप्त किए थे।
टैक्सपेयर ने अपने दावे के समर्थन में फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, बैंक स्टेटमेंट, ईपीएफओ अकाउंट स्टेटमेंट, बैंक रिकन्सिलिएशन और शपथपत्र जैसे दस्तावेज पेश किए। ईपीएफओ रिकॉर्ड से भी पता चला कि संबंधित वित्त वर्ष में कोई निकासी नहीं हुई थी। टैक्सपेयर ने एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया कि आईटीआर में दर्ज आंकड़ा केवल एक क्लर्क/डेटा-एंट्री की चूक था।

सिर्फ ITR में रकम दिखना पर्याप्त नहीं

आईटीएटी मुंबई ने मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि इनकम टैक्स केवल वास्तविक आय पर लगाया जा सकता है, काल्पनिक या गैर-मौजूद आय पर नहीं। जब तक आयकर विभाग यह साबित न कर दे कि करदाता को वास्तव में पैसा प्राप्त हुआ है, तब तक केवल आईटीआर की गलत एंट्री के आधार पर टैक्स नहीं मांगा जा सकता। ITAT ने इसी आधार पर 9.60 लाख रुपये की पूरी एडिशन हटाने का निर्देश दिया।

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