विराट को विदेश में सचिन से बेहतर बताकर फंस हो गए थे एबी डिविलियर्स, आलोचना होने के बाद दी सफाई

Updated on 27-08-2026
नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स को विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर की तुलना को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। विवाद बढ़ने के बाद डिविलियर्स ने सफाई दी है और कहा है कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया। डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा था कि विदेशी परिस्थितियों, खासकर उछाल और सीम मूवमेंट वाली पिचों पर बल्लेबाजी के मामले में विराट कोहली उन्हें सचिन तेंदुलकर से बेहतर नजर आते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना था कि भारतीय बल्लेबाजों के लिए विदेशों में सफलता की राह सबसे पहले सचिन ने ही दिखाई थी।

एबी डिविलियर्स ने क्या कहा था?

डिविलियर्स ने कहा था कि सचिन तेंदुलकर पहले ऐसे भारतीय बल्लेबाज थे जिन्होंने दुनिया को दिखाया कि उपमहाद्वीप का बल्लेबाज भी तेज और उछाल वाली पिचों पर सफल हो सकता है। लेकिन उनके अनुसार विराट कोहली ने उस स्तर को और आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा था कि सचिन ने रास्ता बनाया, जबकि विराट ने उसे अलग लेवल पर ले गए। डिविलियर्स ने यह भी कहा कि राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे युवा बल्लेबाज विराट और सचिन के नक्शेकदम पर चल रहे हैं।

विवाद के बाद डिविलियर्स की सफाई

अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद एबी डिविलियर्स ने एक और वीडियो जारी कर सफाई दी है कि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राय है और उनका उद्देश्य किसी खिलाड़ी को कमतर दिखाना नहीं था। उन्होंने कहा 'विराट और सचिन को लेकर मेरी कमेंट पर थोड़ी गलतफहमी हुई। याद रखें, यह मेरी राय है। मैं किसी को टीम से बाहर नहीं कर रहा हूं। मैं बस अपनी बात रख रहा हूं। सचिन ने ही भारत के लिए आगे बढ़कर काम किया और युवा खिलाड़ियों को दिखाया कि दुनिया भर में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए क्या जरूरी है। मैंने कहा था कि विराट ने शॉर्ट बॉल पर अच्छा खेलकर दिखाया कि भारतीय बल्लेबाजी का एक अलग ही अंदाज हो सकता है। उन्होंने इसका सामना करने का तरीका ढूंढ निकाला।'

विराट कोहली पर भी बोले

पूर्व साउथ अफ्रीकी कप्तान एबी डिविलियर्स ने यह भी स्वीकार किया कि विदेशी जमीन पर आंकड़ों के लिहाज से सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड विराट कोहली से बेहतर है। उन्होंने कहा, 'हम हमेशा आंकड़े देखकर कह सकते हैं कि विदेश में विराट का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। इंग्लैंड में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन मुझे फिर भी लगता है कि वह आत्मविश्वास से भरे दिखे और उन्होंने विदेश में सफल होने के लिए जरूरी हर तरह का, संतुलित खेल दिखाया और अपने आस-पास के कई युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने सचिन से जो सीखा, उसे आगे बढ़ाया। घर से बाहर उनका रिकॉर्ड सचिन जितना अच्छा नहीं है, लेकिन हम हमेशा आंकड़े नहीं देखते, खासकर मैं तो नहीं। मेरा यही मतलब था कि नई पीढ़ी के क्रिकेटरों को दिखाया जाए कि आगे का रास्ता कैसा होना चाहिए। फिट रहना, उदाहरण पेश करके नेतृत्व करना और हर तरह का खेल खेलना।'

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