राखी के रंगों से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, बिहान से महिलाओं को मिला हुनर और स्वरोजगार का अवसर

Updated on 02-08-2026
एमसीबी। रक्षाबंधन का पर्व जहां भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, वहीं मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में इस पर्व ने ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी खोल दिए हैं। बिहान योजना के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आकर्षक एवं हस्तनिर्मित राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अंकिता सोम के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ना, उनकी आय के नए स्रोत विकसित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण में महिलाएं पूरे उत्साह और लगन के साथ राखी निर्माण की बारीकियां सीख रही हैं।

डिजाइनिंग से पैकेजिंग तक, राखी कारोबार के गुर

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को विभिन्न प्रकार की डिजाइनर राखियां तैयार करने, रंगों के बेहतर संयोजन, सजावट, फिनिशिंग और आकर्षक पैकिंग की तकनीक सिखाई जा रही है। इसके साथ ही उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए विपणन की जानकारी भी दी जा रही है। प्रशिक्षण की खास बात यह है कि महिलाओं को केवल पारंपरिक तरीके से राखी बनाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री के तौर-तरीके भी बताए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय बाजार से आगे बढ़ाकर डिजिटल बाजार से जोड़ना है।

सोशल मीडिया बनेगा बाजार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पहुंच

प्रशिक्षण ले रहीं महिलाओं का कहना है कि वे राखी निर्माण का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आकर्षक राखियां तैयार करेंगी और स्थानीय बाजार में उनकी बिक्री करेंगी। साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रचार करेंगी।

महिलाएं मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी अपने उत्पादों को बेचने का प्रयास करेंगी। उनका मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए उनके उत्पाद जिले से बाहर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। इससे बाजार का विस्तार होगा और समूह की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे।


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